
UP पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ाई धज्जियां, अधिवक्ता को लगाई हथकड़ी, वकीलों ने दी चेतावनी
लोकायुक्त न्यूज़
उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ थाना अकराबाद क्षेत्र में पुलिस द्वारा किए गए एक कृत्य ने पूरे अधिवक्ता समुदाय में रोष उत्पन्न कर दिया है। अधिवक्ता के परिवार को माफियाओं से बचाने के बजाय पुलिस ने पीड़ित अधिवक्ता और उनके परिवार के साथ मारपीट करते हुए उन्हें ही धारा 151 में जेल भेज दिया। यह मामला न केवल पुलिस के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी अवहेलना करता है।
अधिवक्ता पवनेश चौधरी के भाई ने थाना अकराबाद पुलिस को माफियाओं के खिलाफ सूचना दी थी। लेकिन यह कदम उनके परिवार पर भारी पड़ गया। माफियाओं ने अधिवक्ता और उनके परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया और मारपीट की। जब अधिवक्ता ने न्याय की गुहार लगाने थाने का रुख किया, तो पुलिस ने मदद करने के बजाय उनके साथ गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया।
अधिवक्ता और उनके परिवार के साथ दुर्व्यवहार करते हुए पुलिसकर्मियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और हथकड़ी तक लगा दी। अधिवक्ता पवनेश चौधरी और उनके साथी प्रतीक चौधरी ने बताया कि पुलिस ने वकालत पेशे का अपमान करते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
इस घटना के बाद अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश फैल गया है। पीड़ित अधिवक्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अगर यह मांग पूरी नहीं होती है, तो अधिवक्ता धरने पर बैठने की चेतावनी दे चुके हैं।
पवनेश चौधरी,अधिवक्ता, सिविल कोर्ट अलीगढ़ कहते हैं कि
“हमने माफियाओं के खिलाफ सूचना दी, लेकिन पुलिस ने मदद करने के बजाय हमारे साथ दुर्व्यवहार किया। यह न्यायपालिका का अपमान है।”
प्रतीक चौधरी,अधिवक्ता, सिविल कोर्ट अलीगढ़ ने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि “दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, नहीं तो हम न्याय के लिए धरना देंगे।”
यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि जनता और अधिवक्ता समुदाय के प्रति उनके व्यवहार पर भी गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

