Welcome to Lokayukt News   Click to listen highlighted text! Welcome to Lokayukt News
Latest Story
blankभारत की इकोनॉमी की दहाड़, FY26 Q2 में 8.2% GDP ग्रोथ से दुनिया को पीछे छोड़ा: टैरिफ से लेकर ग्लोबल मंदी तक हिंदुस्तान ने सभी चुनौतियों को कैसे दिया मोदी रिफॉर्म्स से जवाबblankन गीता का श्लोक सुन पा रही, न भक्ति भजन… आरफा खानम आपका ये दर्द कैसे होगा कम: मुस्लिम-मुस्लिम करो पर राम मंदिर, भगवा और हिंदुओं से चिढ़ क्योंblankनेपाल ने नए नोट में दी कालापानी-लिपुलेख-लिम्पियाधुरा वाले नक्शे को दी जगह, फैसले पर दिखी भारत विरोध की छाप: MEA ने जताई कड़ी आपत्ति, जानें क्या है मामलाblankबाढ़ या भारी बारिश से नहीं सूखे के चलते ‘खत्म हुई’ सिंधु घाटी सभ्यता: दशकों तक बार-बार पड़े अकाल ने कैसे बदला भारत का इतिहास, पढ़ें नए शोध में क्या-क्या आया सामने?blankअमेरिका में तीसरी दुनिया के लोगों की नो-एंट्री, डोनाल्ड ट्रंप ने लगाया स्थाई बैन: जानें- इस थर्ड वर्ल्ड में शामिल हैं कौन से देश, जिन्हें US में माना जा रहा अनवॉन्टेडblankभारत की 75% आबादी भूकंप से हाई रिस्क में, कभी भी डोल सकती है धरती: BIS नक्शे में पूरा हिमालय VI जोन में, जानें- ये बात परेशान करने वाली क्यों है?blankताकि प्रेमानंद महाराज के मार्ग में न दिखे मांस- शराब, गौरक्षक ने की ठेके बंद कराने की माँग: पुलिस ने दक्ष चौधरी को पकड़ा, जानिए FIR की पूरी डिटेल; बागेश्वर बाबा हिंदू कार्यकर्ता के समर्थन में आएblankक्रूज पर्यटन को दिया विस्तार, दुर्गा पूजा को दिलाई UNESCO में पहचान: जानिए मोदी सरकार ने बंगाल टूरिज्म को बढ़ाने के लिए क्या-क्या किया, अब सारा क्रेडिट ले रहीं CM ममता बनर्जीblankइथियोपिया में 12000 साल बाद फटा ज्वालामुखी, दिल्ली तक पहुँची ‘काँच वाली’ राख: फ्लाइट्स के लिए बनी संकट, जानें इसे क्यों माना जा रहा ‘साइलेंट किलर’ ?blank‘ब्राह्मण की बेटी से शादी या संबंध बनने तक आरक्षण’: IAS संतोष वर्मा का नफरती बयान Viral, जानें- फर्जीवाड़े में जेल जा चुका ये जातिवादी विक्षिप्त आखिर है कौन?
जिस चंडीगढ़ संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष मचा रहा बवाल, उसे पेश करने नहीं जा रही मोदी सरकार: जानिए क्या है अनुच्छेद 240, जिससे मिलते हैं राष्ट्रपति को अधिकार आगामी शीतकालीन सत्र में चंडीगढ़ को लेकर केन्द्र सरकार के संशोधन विधेयक की अफवाह और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया के बीच केन्द्र सरकार ने साफ कर दिया है कि चंडीगढ़ की शासन प्रणाली जैसी चल रही है वैसी ही चलेगी। सरकार इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं करने जा रही है। पंजाब और हरियाणा के साथ जैसा संबंध चंडीगढ़ का है, वैसा ही बना रहेगा। संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है| इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है| इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़…— PIB – Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) November 23, 2025 गृह मंत्रालय ने लोगों को आश्वस्त किया है कि चंडीगढ़ के हितों को ध्यान रखते हुए, सभी पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद ही कोई फैसला सरकार लेगी। दरअसल ये अफवाह उड़ी थी कि सरकार शीतकालीन सत्र में 131 वां संविधान संशोधन बिल पेश करने जा रही है और चंडीगढ़ को अन्य केन्द्र शासित प्रदेशों मसलन लक्षद्वीप, अंडमान- निकोबार द्वीप समूह, दादर नागर हवेली आदि की तरह केन्द्र शासित प्रदेश बनाएगी। विपक्ष के उठे विरोध के स्वर चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 में शामिल की अफवाह उड़ते ही विपक्षी दलों खास कर कॉन्ग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे पंजाब की पहचान से जोड़ा है। उन्होंने कहा है कि सरकार संविधान के फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियाँ उड़ा रही है। BJP की केंद्र सरकार द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को खत्म करने की कोशिश किसी साधारण कदम का हिस्सा नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियाँ उड़ाकर पंजाबियों के हक़ छीनने की यह मानसिकता बेहद खतरनाक… https://t.co/Ed9Q3KNGYi— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) November 23, 2025 वहीं पंजाब के सीएम भगवंत मान ने इसे पंजाब की आत्मा पर चोट पहुँचाने वाला फैसला करार दिया। उनका कहना है कि चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार कम करने की कोशिश की जा रही है। To plan and formulate a strong and decisive response against the anti-Punjab Constitution (131st Amendment) Bill, which aims to demolish Punjab’s rightful claim over Chandigarh, I have called an EMERGENCY MEETING of the Core Committee of the party at 2 PM on Monday at the Party… pic.twitter.com/f3cmFsIq9c— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) November 23, 2025 वहीं शिरोमणि अकाली दल ने संघीय ढाँचे पर कुठाराघात करार देते हुए कहा है कि चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। हालाँकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार (23 नवंबर 2025) को साफ किया कि चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार की तरफ से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया कि आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस संबंध में कोई बिल लाने की सरकार की मंशा नहीं है। ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਅਭਿੰਨ ਹਿੱਸਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਭਾਜਪਾ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹਿੱਤਾਂ ਨਾਲ ਦ੍ਰਿੜਤਾ ਨਾਲ ਖੜੀ ਹੈ, ਤੇ ਉਹ ਚਾਹੇ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦਾ ਮੁੱਦਾ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਚਾਹੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪਾਣੀਆਂ ਦਾ। ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਸਬੰਧੀ ਜੋ ਵੀ ਭਰਮ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਪੈਦਾ ਹੋਈ ਹੈ, ਇਸ ਬਾਰੇ ਸਰਕਾਰ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਕੇ ਇਹ ਭਰਮ ਵੀ ਦੂਰ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਮੈਂ ਖੁਦ ਇਕ ਪੰਜਾਬੀ ਹੋਣ ਦੇ…— Sunil Jakhar (@sunilkjakhar) November 23, 2025 बीजेपी ने इसे जबरदस्ती विवाद खड़ा करने और अनावश्यक राजनीतिक करने का आरोप विपक्ष पर लगाया। बीजेपी पंजाब के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि बीजेपी की प्राथमिकता पंजाब और चंडीगढ़ के हित में रही है। उन्होंने भरोसा दिया कि किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति में केन्द्र सरकार से बातचीत कर जानकारी स्पष्ट की जाएगी। आर्टिकल 240 क्या है राष्ट्रपति को केन्द्र शासित प्रदेशों जैसे लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादर नागर हवेली में सीधा हस्तक्षेप कर जरूरी नियम और कानून बना सकते हैं और बदलाव भी कर सकते हैं। दरअसल अनुच्छेद 240 के मुताबिक, राष्ट्रपति जो भी नया नियम बनाएँगे, वह पुराने को खत्म कर सकता है या पुराने कानून में बदलाव कर सकता है। राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम संसद में पारित कानून के बराबर ताकतवर होगा। दरअसल पुद्दुचेरी जैसे केन्द्र शासित प्रदेशों में विधानसभा हैं। ये अनुच्छेद 239ए के तहत आते हैं। यहाँ विधानसभा की पहली बैठक के दिन से ही राष्ट्रपति का सीधा कानून बनाने का अधिकार निरस्त हो जाता है। विधानसभा निलंबित या भंग होने की स्थिति में ही राष्ट्रपति सीधा इन क्षेत्रों के लिए नियम बना सकते हैं। पहले अफवाह उड़ी कि चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के अंतर्गत ले आया जाएगा। अगर ऐसा होता तो यहाँ अलग प्रशासक यानी एलजी की नियुक्ति की जाती। अभी तक पंजाब के राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में चंडीगढ़ आता है। संविधान संशोधन के जरिए चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के अंतर्गत लाने पर ये खत्म हो जाता। सीधे राष्ट्रपति को कानून बनाने का अधिकार मिल जाता। चंडीगढ़ पूरी तरह केन्द्र शासित प्रदेश बन जाता, जैसा अंडमान निकोबार, दादर नागर हवेली और लक्षद्वीप है। इन क्षेत्रों में विधानसभा नहीं है और ये केन्द्र शासित प्रदेश हैं। आरोप लगाया गया कि लोकसभा और राज्यसभा की बुलेटिन के मुताबिक, विधेयक 1 दिसंबर 2025 को संसद के पटल पर रखा जाएगा। इसके बाद चंडीगढ़ उन केन्द्र शासित प्रदेशों में लाया जाएगा, जो पहले से अनुच्छेद 240 के अंतर्गत आते हैं। चंडीगढ़ को लेकर क्या है विवाद चंडीगढ़ फिलहाल पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी है। इस पर हक जताने की वजह से दोनों राज्य एक-दूसरे से भिड़ते रहते हैं। पंजाब के राज्यपाल ही अभी चंडीगढ़ के प्रशासक के तौर पर काम करते हैं। यानी राजधानी भले ही हरियाणा-पंजाब दोनों की हो, लेकिन प्रशासनिक शक्ति पंजाब के पास है। अगर 131संशोधन विधेयक पारित होता, तो चंडीगढ़ में बड़ा बदलाव आ जाता। केन्द्र को चंडीगढ़ का एलजी नियुक्त करना पड़ता और केन्द्र के पास चंडीगढ़ की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी होती। पंजाब का कहना है कि चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा बोलने वाले ज्यादा है। इसे पंजाब के क्षेत्र को खाली कर बसाया गया और विकसित किया गया था। इसलिए आज भी यह पंजाब का ही पार्ट है। वहीं, हरियाणा का कहना है कि इस क्षेत्र में गैर पंजाबियों की संख्या काफी है। जब हरियाणा बना तो उसे हरियाणा में शामिल होना चाहिए। चंडीगढ़ का इतिहास भारत विभाजन के वक्त 1947 में लाहौर पर पाकिस्तान का अधिकार हो गया। इस वक्त पंजाब के पास अपनी राजधानी नहीं थी। इसको देखते हुए 1950 के दशक में नई आधुनिक राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया। इनमें से ही एक है चंडीगढ़, जिसे प्लान सिटी भी कहते हैं। 1966 में Punjab Reorganisation act लाया गया। इसके तहत पंजाब का विभाजन हुआ। पंजाबी भाषा भाषी क्षेत्र को पंजाब में रखा गया जबकि हिन्दी या हरियाणवी भाषा भाषी क्षेत्र को हरियाणा में रखा गया। उस वक्त हरियाणा की राजधानी भी चंडीगढ़ को बना दिया गया।   Click to listen highlighted text! जिस चंडीगढ़ संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष मचा रहा बवाल, उसे पेश करने नहीं जा रही मोदी सरकार: जानिए क्या है अनुच्छेद 240, जिससे मिलते हैं राष्ट्रपति को अधिकार आगामी शीतकालीन सत्र में चंडीगढ़ को लेकर केन्द्र सरकार के संशोधन विधेयक की अफवाह और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया के बीच केन्द्र सरकार ने साफ कर दिया है कि चंडीगढ़ की शासन प्रणाली जैसी चल रही है वैसी ही चलेगी। सरकार इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं करने जा रही है। पंजाब और हरियाणा के साथ जैसा संबंध चंडीगढ़ का है, वैसा ही बना रहेगा। संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है| इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है| इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़…— PIB – Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) November 23, 2025 गृह मंत्रालय ने लोगों को आश्वस्त किया है कि चंडीगढ़ के हितों को ध्यान रखते हुए, सभी पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद ही कोई फैसला सरकार लेगी। दरअसल ये अफवाह उड़ी थी कि सरकार शीतकालीन सत्र में 131 वां संविधान संशोधन बिल पेश करने जा रही है और चंडीगढ़ को अन्य केन्द्र शासित प्रदेशों मसलन लक्षद्वीप, अंडमान- निकोबार द्वीप समूह, दादर नागर हवेली आदि की तरह केन्द्र शासित प्रदेश बनाएगी। विपक्ष के उठे विरोध के स्वर चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 में शामिल की अफवाह उड़ते ही विपक्षी दलों खास कर कॉन्ग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे पंजाब की पहचान से जोड़ा है। उन्होंने कहा है कि सरकार संविधान के फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियाँ उड़ा रही है। BJP की केंद्र सरकार द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को खत्म करने की कोशिश किसी साधारण कदम का हिस्सा नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियाँ उड़ाकर पंजाबियों के हक़ छीनने की यह मानसिकता बेहद खतरनाक… https://t.co/Ed9Q3KNGYi— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) November 23, 2025 वहीं पंजाब के सीएम भगवंत मान ने इसे पंजाब की आत्मा पर चोट पहुँचाने वाला फैसला करार दिया। उनका कहना है कि चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार कम करने की कोशिश की जा रही है। To plan and formulate a strong and decisive response against the anti-Punjab Constitution (131st Amendment) Bill, which aims to demolish Punjab’s rightful claim over Chandigarh, I have called an EMERGENCY MEETING of the Core Committee of the party at 2 PM on Monday at the Party… pic.twitter.com/f3cmFsIq9c— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) November 23, 2025 वहीं शिरोमणि अकाली दल ने संघीय ढाँचे पर कुठाराघात करार देते हुए कहा है कि चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। हालाँकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार (23 नवंबर 2025) को साफ किया कि चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार की तरफ से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया कि आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस संबंध में कोई बिल लाने की सरकार की मंशा नहीं है। ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਅਭਿੰਨ ਹਿੱਸਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਭਾਜਪਾ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹਿੱਤਾਂ ਨਾਲ ਦ੍ਰਿੜਤਾ ਨਾਲ ਖੜੀ ਹੈ, ਤੇ ਉਹ ਚਾਹੇ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦਾ ਮੁੱਦਾ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਚਾਹੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪਾਣੀਆਂ ਦਾ। ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਸਬੰਧੀ ਜੋ ਵੀ ਭਰਮ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਪੈਦਾ ਹੋਈ ਹੈ, ਇਸ ਬਾਰੇ ਸਰਕਾਰ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਕੇ ਇਹ ਭਰਮ ਵੀ ਦੂਰ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਮੈਂ ਖੁਦ ਇਕ ਪੰਜਾਬੀ ਹੋਣ ਦੇ…— Sunil Jakhar (@sunilkjakhar) November 23, 2025 बीजेपी ने इसे जबरदस्ती विवाद खड़ा करने और अनावश्यक राजनीतिक करने का आरोप विपक्ष पर लगाया। बीजेपी पंजाब के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि बीजेपी की प्राथमिकता पंजाब और चंडीगढ़ के हित में रही है। उन्होंने भरोसा दिया कि किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति में केन्द्र सरकार से बातचीत कर जानकारी स्पष्ट की जाएगी। आर्टिकल 240 क्या है राष्ट्रपति को केन्द्र शासित प्रदेशों जैसे लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादर नागर हवेली में सीधा हस्तक्षेप कर जरूरी नियम और कानून बना सकते हैं और बदलाव भी कर सकते हैं। दरअसल अनुच्छेद 240 के मुताबिक, राष्ट्रपति जो भी नया नियम बनाएँगे, वह पुराने को खत्म कर सकता है या पुराने कानून में बदलाव कर सकता है। राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम संसद में पारित कानून के बराबर ताकतवर होगा। दरअसल पुद्दुचेरी जैसे केन्द्र शासित प्रदेशों में विधानसभा हैं। ये अनुच्छेद 239ए के तहत आते हैं। यहाँ विधानसभा की पहली बैठक के दिन से ही राष्ट्रपति का सीधा कानून बनाने का अधिकार निरस्त हो जाता है। विधानसभा निलंबित या भंग होने की स्थिति में ही राष्ट्रपति सीधा इन क्षेत्रों के लिए नियम बना सकते हैं। पहले अफवाह उड़ी कि चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के अंतर्गत ले आया जाएगा। अगर ऐसा होता तो यहाँ अलग प्रशासक यानी एलजी की नियुक्ति की जाती। अभी तक पंजाब के राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में चंडीगढ़ आता है। संविधान संशोधन के जरिए चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के अंतर्गत लाने पर ये खत्म हो जाता। सीधे राष्ट्रपति को कानून बनाने का अधिकार मिल जाता। चंडीगढ़ पूरी तरह केन्द्र शासित प्रदेश बन जाता, जैसा अंडमान निकोबार, दादर नागर हवेली और लक्षद्वीप है। इन क्षेत्रों में विधानसभा नहीं है और ये केन्द्र शासित प्रदेश हैं। आरोप लगाया गया कि लोकसभा और राज्यसभा की बुलेटिन के मुताबिक, विधेयक 1 दिसंबर 2025 को संसद के पटल पर रखा जाएगा। इसके बाद चंडीगढ़ उन केन्द्र शासित प्रदेशों में लाया जाएगा, जो पहले से अनुच्छेद 240 के अंतर्गत आते हैं। चंडीगढ़ को लेकर क्या है विवाद चंडीगढ़ फिलहाल पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी है। इस पर हक जताने की वजह से दोनों राज्य एक-दूसरे से भिड़ते रहते हैं। पंजाब के राज्यपाल ही अभी चंडीगढ़ के प्रशासक के तौर पर काम करते हैं। यानी राजधानी भले ही हरियाणा-पंजाब दोनों की हो, लेकिन प्रशासनिक शक्ति पंजाब के पास है। अगर 131संशोधन विधेयक पारित होता, तो चंडीगढ़ में बड़ा बदलाव आ जाता। केन्द्र को चंडीगढ़ का एलजी नियुक्त करना पड़ता और केन्द्र के पास चंडीगढ़ की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी होती। पंजाब का कहना है कि चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा बोलने वाले ज्यादा है। इसे पंजाब के क्षेत्र को खाली कर बसाया गया और विकसित किया गया था। इसलिए आज भी यह पंजाब का ही पार्ट है। वहीं, हरियाणा का कहना है कि इस क्षेत्र में गैर पंजाबियों की संख्या काफी है। जब हरियाणा बना तो उसे हरियाणा में शामिल होना चाहिए। चंडीगढ़ का इतिहास भारत विभाजन के वक्त 1947 में लाहौर पर पाकिस्तान का अधिकार हो गया। इस वक्त पंजाब के पास अपनी राजधानी नहीं थी। इसको देखते हुए 1950 के दशक में नई आधुनिक राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया। इनमें से ही एक है चंडीगढ़, जिसे प्लान सिटी भी कहते हैं। 1966 में Punjab Reorganisation act लाया गया। इसके तहत पंजाब का विभाजन हुआ। पंजाबी भाषा भाषी क्षेत्र को पंजाब में रखा गया जबकि हिन्दी या हरियाणवी भाषा भाषी क्षेत्र को हरियाणा में रखा गया। उस वक्त हरियाणा की राजधानी भी चंडीगढ़ को बना दिया गया।

जिस चंडीगढ़ संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष मचा रहा बवाल, उसे पेश करने नहीं जा रही मोदी सरकार: जानिए क्या है अनुच्छेद 240, जिससे मिलते हैं राष्ट्रपति को अधिकार

आगामी शीतकालीन सत्र में चंडीगढ़ को लेकर केन्द्र सरकार के संशोधन विधेयक की अफवाह और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया के बीच केन्द्र सरकार ने साफ कर दिया है कि चंडीगढ़ की शासन प्रणाली जैसी चल रही है वैसी ही चलेगी। सरकार इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं करने जा रही है। पंजाब और हरियाणा के साथ जैसा संबंध चंडीगढ़ का है, वैसा ही बना रहेगा।

संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है| इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है| इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़…— PIB – Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) November 23, 2025

गृह मंत्रालय ने लोगों को आश्वस्त किया है कि चंडीगढ़ के हितों को ध्यान रखते हुए, सभी पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद ही कोई फैसला सरकार लेगी।

दरअसल ये अफवाह उड़ी थी कि सरकार शीतकालीन सत्र में 131 वां संविधान संशोधन बिल पेश करने जा रही है और चंडीगढ़ को अन्य केन्द्र शासित प्रदेशों मसलन लक्षद्वीप, अंडमान- निकोबार द्वीप समूह, दादर नागर हवेली आदि की तरह केन्द्र शासित प्रदेश बनाएगी।

विपक्ष के उठे विरोध के स्वर

चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 में शामिल की अफवाह उड़ते ही विपक्षी दलों खास कर कॉन्ग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे पंजाब की पहचान से जोड़ा है। उन्होंने कहा है कि सरकार संविधान के फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियाँ उड़ा रही है।

BJP की केंद्र सरकार द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को खत्म करने की कोशिश किसी साधारण कदम का हिस्सा नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियाँ उड़ाकर पंजाबियों के हक़ छीनने की यह मानसिकता बेहद खतरनाक… https://t.co/Ed9Q3KNGYi— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) November 23, 2025

वहीं पंजाब के सीएम भगवंत मान ने इसे पंजाब की आत्मा पर चोट पहुँचाने वाला फैसला करार दिया। उनका कहना है कि चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार कम करने की कोशिश की जा रही है।

To plan and formulate a strong and decisive response against the anti-Punjab Constitution (131st Amendment) Bill, which aims to demolish Punjab’s rightful claim over Chandigarh, I have called an EMERGENCY MEETING of the Core Committee of the party at 2 PM on Monday at the Party… pic.twitter.com/f3cmFsIq9c— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) November 23, 2025

वहीं शिरोमणि अकाली दल ने संघीय ढाँचे पर कुठाराघात करार देते हुए कहा है कि चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है और इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

हालाँकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार (23 नवंबर 2025) को साफ किया कि चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार की तरफ से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया कि आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस संबंध में कोई बिल लाने की सरकार की मंशा नहीं है।

ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਅਭਿੰਨ ਹਿੱਸਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਭਾਜਪਾ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹਿੱਤਾਂ ਨਾਲ ਦ੍ਰਿੜਤਾ ਨਾਲ ਖੜੀ ਹੈ, ਤੇ ਉਹ ਚਾਹੇ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦਾ ਮੁੱਦਾ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਚਾਹੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪਾਣੀਆਂ ਦਾ। ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਸਬੰਧੀ ਜੋ ਵੀ ਭਰਮ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਪੈਦਾ ਹੋਈ ਹੈ, ਇਸ ਬਾਰੇ ਸਰਕਾਰ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਕੇ ਇਹ ਭਰਮ ਵੀ ਦੂਰ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਮੈਂ ਖੁਦ ਇਕ ਪੰਜਾਬੀ ਹੋਣ ਦੇ…— Sunil Jakhar (@sunilkjakhar) November 23, 2025

बीजेपी ने इसे जबरदस्ती विवाद खड़ा करने और अनावश्यक राजनीतिक करने का आरोप विपक्ष पर लगाया। बीजेपी पंजाब के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि बीजेपी की प्राथमिकता पंजाब और चंडीगढ़ के हित में रही है। उन्होंने भरोसा दिया कि किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति में केन्द्र सरकार से बातचीत कर जानकारी स्पष्ट की जाएगी।

आर्टिकल 240 क्या है

राष्ट्रपति को केन्द्र शासित प्रदेशों जैसे लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादर नागर हवेली में सीधा हस्तक्षेप कर जरूरी नियम और कानून बना सकते हैं और बदलाव भी कर सकते हैं।

दरअसल अनुच्छेद 240 के मुताबिक, राष्ट्रपति जो भी नया नियम बनाएँगे, वह पुराने को खत्म कर सकता है या पुराने कानून में बदलाव कर सकता है। राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम संसद में पारित कानून के बराबर ताकतवर होगा।

दरअसल पुद्दुचेरी जैसे केन्द्र शासित प्रदेशों में विधानसभा हैं। ये अनुच्छेद 239ए के तहत आते हैं। यहाँ विधानसभा की पहली बैठक के दिन से ही राष्ट्रपति का सीधा कानून बनाने का अधिकार निरस्त हो जाता है। विधानसभा निलंबित या भंग होने की स्थिति में ही राष्ट्रपति सीधा इन क्षेत्रों के लिए नियम बना सकते हैं।

पहले अफवाह उड़ी कि चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के अंतर्गत ले आया जाएगा। अगर ऐसा होता तो यहाँ अलग प्रशासक यानी एलजी की नियुक्ति की जाती। अभी तक पंजाब के राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में चंडीगढ़ आता है। संविधान संशोधन के जरिए चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के अंतर्गत लाने पर ये खत्म हो जाता। सीधे राष्ट्रपति को कानून बनाने का अधिकार मिल जाता।

चंडीगढ़ पूरी तरह केन्द्र शासित प्रदेश बन जाता, जैसा अंडमान निकोबार, दादर नागर हवेली और लक्षद्वीप है। इन क्षेत्रों में विधानसभा नहीं है और ये केन्द्र शासित प्रदेश हैं।

आरोप लगाया गया कि लोकसभा और राज्यसभा की बुलेटिन के मुताबिक, विधेयक 1 दिसंबर 2025 को संसद के पटल पर रखा जाएगा। इसके बाद चंडीगढ़ उन केन्द्र शासित प्रदेशों में लाया जाएगा, जो पहले से अनुच्छेद 240 के अंतर्गत आते हैं।

चंडीगढ़ को लेकर क्या है विवाद

चंडीगढ़ फिलहाल पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी है। इस पर हक जताने की वजह से दोनों राज्य एक-दूसरे से भिड़ते रहते हैं। पंजाब के राज्यपाल ही अभी चंडीगढ़ के प्रशासक के तौर पर काम करते हैं। यानी राजधानी भले ही हरियाणा-पंजाब दोनों की हो, लेकिन प्रशासनिक शक्ति पंजाब के पास है।

अगर 131संशोधन विधेयक पारित होता, तो चंडीगढ़ में बड़ा बदलाव आ जाता। केन्द्र को चंडीगढ़ का एलजी नियुक्त करना पड़ता और केन्द्र के पास चंडीगढ़ की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी होती।

पंजाब का कहना है कि चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा बोलने वाले ज्यादा है। इसे पंजाब के क्षेत्र को खाली कर बसाया गया और विकसित किया गया था। इसलिए आज भी यह पंजाब का ही पार्ट है। वहीं, हरियाणा का कहना है कि इस क्षेत्र में गैर पंजाबियों की संख्या काफी है। जब हरियाणा बना तो उसे हरियाणा में शामिल होना चाहिए।

चंडीगढ़ का इतिहास

भारत विभाजन के वक्त 1947 में लाहौर पर पाकिस्तान का अधिकार हो गया। इस वक्त पंजाब के पास अपनी राजधानी नहीं थी। इसको देखते हुए 1950 के दशक में नई आधुनिक राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया। इनमें से ही एक है चंडीगढ़, जिसे प्लान सिटी भी कहते हैं।

1966 में Punjab Reorganisation act लाया गया। इसके तहत पंजाब का विभाजन हुआ। पंजाबी भाषा भाषी क्षेत्र को पंजाब में रखा गया जबकि हिन्दी या हरियाणवी भाषा भाषी क्षेत्र को हरियाणा में रखा गया। उस वक्त हरियाणा की राजधानी भी चंडीगढ़ को बना दिया गया।

  • blank

    Related Posts

    • blank
    • November 29, 2025
    • 20 views
    भारत की इकोनॉमी की दहाड़, FY26 Q2 में 8.2% GDP ग्रोथ से दुनिया को पीछे छोड़ा: टैरिफ से लेकर ग्लोबल मंदी तक हिंदुस्तान ने सभी चुनौतियों को कैसे दिया मोदी रिफॉर्म्स से जवाब

    वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मंदी की चुनौतियों को करारा जवाब देते हुए 8.2% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय…

    • blank
    • November 29, 2025
    • 19 views
    न गीता का श्लोक सुन पा रही, न भक्ति भजन… आरफा खानम आपका ये दर्द कैसे होगा कम: मुस्लिम-मुस्लिम करो पर राम मंदिर, भगवा और हिंदुओं से चिढ़ क्यों

    अपनी इस्लामी पत्रकारिता के लिए कु्ख्यात आरफा खानम शेरवानी एक बार फिर सोशल मीडिया पर रोना-धोना मचाए हुए हैं। आरफा खानम का दुख ये है कि आखिर ये जो टीवी…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    error: Content is protected !!
    Click to listen highlighted text!