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कुशीनगर के हाटा कोतवाली के बाहर डीसीएम में बंद मिले गोवंश, 18 घंटे तक बिना चारा-पानी भूख प्यास से तड़पते रहे गौवंश, वीडियो हुआ वायरल, जांच में निकला चौंकाने वाला सच

कुशीनगर के हाटा कोतवाली के बाहर डीसीएम में बंद मिले गोवंश, 18 घंटे तक बिना चारा-पानी भूख प्यास से तड़पते रहे गौवंश, ग्रामीणों ने पिलाई पानी,वीडियो हुआ वायरल, जांच में निकला चौंकाने वाला सच

blank लोकायुक्त न्यूज ब्यूरो,कुशीनगर। हाटा कोतवाली के बाहर गुरुवार को खड़ी एक डीसीएम गाड़ी से गोवंशों की आवाजें आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। जब स्थानीय लोगों ने ट्रक के अंदर झांका, तो देखा कि कई गायें और बछड़े भूख-प्यास से बेहाल थे। कुछ गायें गर्भवती थीं और कुछ बछड़े भी शामिल थे। ग्रामीणों ने तुरंत आगे बढ़कर उन्हें पानी पिलाया और जान बचाने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। जानकारी के अनुसार, बुधवार की आधी रात करीब 1 बजे पुलिस ने संदिग्ध मानकर एक डीसीएम को रोका था। उसमें आठ गोवंश सवार पाए गए। पुलिस ने चालक और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की और वाहन को कोतवाली परिसर के बाहर खड़ा कर दिया। गुरुवार पूरे दिन वाहन वहीं खड़ा रहा, परंतु गोवंशों के लिए चारा-पानी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। शाम को जब कुछ स्थानीय लोग वहां से गुजरे तो उन्हें ट्रक के भीतर से पशुओं की कराह सुनाई दी। कोतवाल हाटा राम सहाय चौहान ने बताया कि डीसीएम में आठ गोवंश मौजूद थे जिन्हें रात में शक के आधार पर लाया गया था। दिन में उन्हें उतारकर चारा-पानी दिया गया था, लेकिन साक्ष्य के तौर पर दोबारा गाड़ी में चढ़ाया गया। वहीं इस पूरे मामले पर एसपी केशव कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी होते ही कसया सीओ कुंदन सिंह को जांच के लिए भेजा गया। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि डीसीएम में मौजूद सभी गायें छपिया मेले से खरीदी गई थीं, जिनके दस्तावेज वैध पाए गए हैं। यह वाहन डेयरी के लिए गोवंश ले जा रहा था, किसी भी तरह के अवैध कारोबार का कोई प्रमाण नहीं मिला है। संबंधित अधिकारियों को चारा-पानी की उचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब सभी दस्तावेज वैध पाए गए और कोई अवैध कार्य सिद्ध नहीं हुआ तो कोतवाली पुलिस ने 18 घंटे तक बिना चारा-पानी के गाड़ी क्यों खड़ी रखी? जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान न दिया गया होता, तो कई गोवंशों की जान जा सकती थी। घटना के बाद लोगों में पुलिस की लापरवाही को लेकर आक्रोश व्याप्त है। और निष्पक्ष जांच कर कठोर कारवाई की मांग किए।
  Click to listen highlighted text! कुशीनगर के हाटा कोतवाली के बाहर डीसीएम में बंद मिले गोवंश, 18 घंटे तक बिना चारा-पानी भूख प्यास से तड़पते रहे गौवंश, वीडियो हुआ वायरल, जांच में निकला चौंकाने वाला सच कुशीनगर के हाटा कोतवाली के बाहर डीसीएम में बंद मिले गोवंश, 18 घंटे तक बिना चारा-पानी भूख प्यास से तड़पते रहे गौवंश, ग्रामीणों ने पिलाई पानी,वीडियो हुआ वायरल, जांच में निकला चौंकाने वाला सच लोकायुक्त न्यूज ब्यूरो,कुशीनगर। हाटा कोतवाली के बाहर गुरुवार को खड़ी एक डीसीएम गाड़ी से गोवंशों की आवाजें आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। जब स्थानीय लोगों ने ट्रक के अंदर झांका, तो देखा कि कई गायें और बछड़े भूख-प्यास से बेहाल थे। कुछ गायें गर्भवती थीं और कुछ बछड़े भी शामिल थे। ग्रामीणों ने तुरंत आगे बढ़कर उन्हें पानी पिलाया और जान बचाने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। जानकारी के अनुसार, बुधवार की आधी रात करीब 1 बजे पुलिस ने संदिग्ध मानकर एक डीसीएम को रोका था। उसमें आठ गोवंश सवार पाए गए। पुलिस ने चालक और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की और वाहन को कोतवाली परिसर के बाहर खड़ा कर दिया। https://lokayuktnews.in/wp-content/uploads/2025/10/VID-20251016-WA0998.mp4 गुरुवार पूरे दिन वाहन वहीं खड़ा रहा, परंतु गोवंशों के लिए चारा-पानी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। शाम को जब कुछ स्थानीय लोग वहां से गुजरे तो उन्हें ट्रक के भीतर से पशुओं की कराह सुनाई दी। कोतवाल हाटा राम सहाय चौहान ने बताया कि डीसीएम में आठ गोवंश मौजूद थे जिन्हें रात में शक के आधार पर लाया गया था। दिन में उन्हें उतारकर चारा-पानी दिया गया था, लेकिन साक्ष्य के तौर पर दोबारा गाड़ी में चढ़ाया गया। वहीं इस पूरे मामले पर एसपी केशव कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी होते ही कसया सीओ कुंदन सिंह को जांच के लिए भेजा गया। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि डीसीएम में मौजूद सभी गायें छपिया मेले से खरीदी गई थीं, जिनके दस्तावेज वैध पाए गए हैं। यह वाहन डेयरी के लिए गोवंश ले जा रहा था, किसी भी तरह के अवैध कारोबार का कोई प्रमाण नहीं मिला है। संबंधित अधिकारियों को चारा-पानी की उचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब सभी दस्तावेज वैध पाए गए और कोई अवैध कार्य सिद्ध नहीं हुआ तो कोतवाली पुलिस ने 18 घंटे तक बिना चारा-पानी के गाड़ी क्यों खड़ी रखी? जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान न दिया गया होता, तो कई गोवंशों की जान जा सकती थी। घटना के बाद लोगों में पुलिस की लापरवाही को लेकर आक्रोश व्याप्त है। और निष्पक्ष जांच कर कठोर कारवाई की मांग किए।

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ब्यूरो,कुशीनगर। हाटा कोतवाली के बाहर गुरुवार को खड़ी एक डीसीएम गाड़ी से गोवंशों की आवाजें आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। जब स्थानीय लोगों ने ट्रक के अंदर झांका, तो देखा कि कई गायें और बछड़े भूख-प्यास से बेहाल थे। कुछ गायें गर्भवती थीं और कुछ बछड़े भी शामिल थे। ग्रामीणों ने तुरंत आगे बढ़कर उन्हें पानी पिलाया और जान बचाने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। जानकारी के अनुसार, बुधवार की आधी रात करीब 1 बजे पुलिस ने संदिग्ध मानकर एक डीसीएम को रोका था। उसमें आठ गोवंश सवार पाए गए। पुलिस ने चालक और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की और वाहन को कोतवाली परिसर के बाहर खड़ा कर दिया।

गुरुवार पूरे दिन वाहन वहीं खड़ा रहा, परंतु गोवंशों के लिए चारा-पानी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। शाम को जब कुछ स्थानीय लोग वहां से गुजरे तो उन्हें ट्रक के भीतर से पशुओं की कराह सुनाई दी। कोतवाल हाटा राम सहाय चौहान ने बताया कि डीसीएम में आठ गोवंश मौजूद थे जिन्हें रात में शक के आधार पर लाया गया था। दिन में उन्हें उतारकर चारा-पानी दिया गया था, लेकिन साक्ष्य के तौर पर दोबारा गाड़ी में चढ़ाया गया। वहीं इस पूरे मामले पर एसपी केशव कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी होते ही कसया सीओ कुंदन सिंह को जांच के लिए भेजा गया। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि डीसीएम में मौजूद सभी गायें छपिया मेले से खरीदी गई थीं, जिनके दस्तावेज वैध पाए गए हैं। यह वाहन डेयरी के लिए गोवंश ले जा रहा था, किसी भी तरह के अवैध कारोबार का कोई प्रमाण नहीं मिला है। संबंधित अधिकारियों को चारा-पानी की उचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब सभी दस्तावेज वैध पाए गए और कोई अवैध कार्य सिद्ध नहीं हुआ तो कोतवाली पुलिस ने 18 घंटे तक बिना चारा-पानी के गाड़ी क्यों खड़ी रखी? जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान न दिया गया होता, तो कई गोवंशों की जान जा सकती थी। घटना के बाद लोगों में पुलिस की लापरवाही को लेकर आक्रोश व्याप्त है। और निष्पक्ष जांच कर कठोर कारवाई की मांग किए।

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