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कचरे में फेंकी गई आयुष्मान कार्ड,स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर,जिम्मेदार मौन 

कचरे में फेंकी गई आयुष्मान कार्ड,स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर,जिम्मेदार मौन 

blank दुदही में मिले आयुष्मान भारत योजना के कार्ड, सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर दुदही, कुशीनगर। "हर गरीब को इलाज का हक" देने के उद्देश्य से शुरू की गई भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना किस हाल में पहुंच चुकी है, इसका ताजा उदाहरण दुदही विकासखंड के बैकुंठपुर कोठी गांव में देखने को मिला। यहां योजना के दर्जनों कार्ड कचरे के ढेर में बिखरे मिले, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इन कार्डों की हालत देखकर यह कहना मुश्किल नहीं कि उन्हें लाभार्थियों तक पहुंचाने के बजाय जानबूझकर फेंक दिया गया या लापरवाही से फाइलों के बोझ तले दफना दिया गया। सवाल यह भी उठता है कि यदि चार वर्षों से ये कार्ड लाभार्थियों तक नहीं पहुंचे और किसी को इलाज न मिल पाने के कारण जान गंवानी पड़ी हो, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? मामले के प्रकाश में आते ही स्वास्थ्य विभाग ने फुर्ती दिखाते हुए आशा कार्यकत्रियों पर दोष मढ़ दिया। लेकिन इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर और भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन से सीधा खिलवाड़ है। साथ ही चर्चा यह भी है कि कहीं यह कार्ड किसी बड़े फर्जीवाड़े या कालाबाजारी का हिस्सा तो नहीं? असली या नकली—इसकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। इस मामले पर जिला प्रशासन की चुप्पी भी संदेह को जन्म दे रही है। हालांकि नवागत जिलाधिकारी से क्षेत्रीय जनता को उम्मीद है कि वे इस अक्षम्य लापरवाही पर कठोर रुख अपनाते हुए निष्पक्ष जांच कराएं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाएं।  
  Click to listen highlighted text! कचरे में फेंकी गई आयुष्मान कार्ड,स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर,जिम्मेदार मौन  कचरे में फेंकी गई आयुष्मान कार्ड,स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर,जिम्मेदार मौन  दुदही में मिले आयुष्मान भारत योजना के कार्ड, सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर दुदही, कुशीनगर। हर गरीब को इलाज का हक देने के उद्देश्य से शुरू की गई भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना किस हाल में पहुंच चुकी है, इसका ताजा उदाहरण दुदही विकासखंड के बैकुंठपुर कोठी गांव में देखने को मिला। यहां योजना के दर्जनों कार्ड कचरे के ढेर में बिखरे मिले, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इन कार्डों की हालत देखकर यह कहना मुश्किल नहीं कि उन्हें लाभार्थियों तक पहुंचाने के बजाय जानबूझकर फेंक दिया गया या लापरवाही से फाइलों के बोझ तले दफना दिया गया। सवाल यह भी उठता है कि यदि चार वर्षों से ये कार्ड लाभार्थियों तक नहीं पहुंचे और किसी को इलाज न मिल पाने के कारण जान गंवानी पड़ी हो, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? मामले के प्रकाश में आते ही स्वास्थ्य विभाग ने फुर्ती दिखाते हुए आशा कार्यकत्रियों पर दोष मढ़ दिया। लेकिन इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर और भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन से सीधा खिलवाड़ है। साथ ही चर्चा यह भी है कि कहीं यह कार्ड किसी बड़े फर्जीवाड़े या कालाबाजारी का हिस्सा तो नहीं? असली या नकली—इसकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। इस मामले पर जिला प्रशासन की चुप्पी भी संदेह को जन्म दे रही है। हालांकि नवागत जिलाधिकारी से क्षेत्रीय जनता को उम्मीद है कि वे इस अक्षम्य लापरवाही पर कठोर रुख अपनाते हुए निष्पक्ष जांच कराएं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाएं।  

कचरे में फेंकी गई आयुष्मान कार्ड,स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर,जिम्मेदार मौन 

कचरे में फेंकी गई आयुष्मान कार्ड,स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर,जिम्मेदार मौन 

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दुदही में मिले आयुष्मान भारत योजना के कार्ड, सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर

दुदही, कुशीनगर। “हर गरीब को इलाज का हक” देने के उद्देश्य से शुरू की गई भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना किस हाल में पहुंच चुकी है, इसका ताजा उदाहरण दुदही विकासखंड के बैकुंठपुर कोठी गांव में देखने को मिला। यहां योजना के दर्जनों कार्ड कचरे के ढेर में बिखरे मिले, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इन कार्डों की हालत देखकर यह कहना मुश्किल नहीं कि उन्हें लाभार्थियों तक पहुंचाने के बजाय जानबूझकर फेंक दिया गया या लापरवाही से फाइलों के बोझ तले दफना दिया गया। सवाल यह भी उठता है कि यदि चार वर्षों से ये कार्ड लाभार्थियों तक नहीं पहुंचे और किसी को इलाज न मिल पाने के कारण जान गंवानी पड़ी हो, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? मामले के प्रकाश में आते ही स्वास्थ्य विभाग ने फुर्ती दिखाते हुए आशा कार्यकत्रियों पर दोष मढ़ दिया। लेकिन इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर और भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन से सीधा खिलवाड़ है। साथ ही चर्चा यह भी है कि कहीं यह कार्ड किसी बड़े फर्जीवाड़े या कालाबाजारी का हिस्सा तो नहीं? असली या नकली—इसकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। इस मामले पर जिला प्रशासन की चुप्पी भी संदेह को जन्म दे रही है। हालांकि नवागत जिलाधिकारी से क्षेत्रीय जनता को उम्मीद है कि वे इस अक्षम्य लापरवाही पर कठोर रुख अपनाते हुए निष्पक्ष जांच कराएं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाएं।

 

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